जन्मज्योति

केतु महादशा

केतु (Ketu) अवधि: 7 वर्ष

केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को मोक्ष, वैराग्य, अंतर्ज्ञान (Intuition), और रहस्यमय विद्याओं का कारक माना जाता है। यह बुध की बौद्धिक दशा के बाद आता है और व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिकता की ओर मोड़ता है।

सामान्य प्रभाव

यह समय भौतिक चीजों से मोहभंग और आध्यात्मिक जागृति का होता है। शुभ केतु गहरे शोध, ध्यान और अचानक सफलता दे सकता है। अशुभ केतु भ्रम, अकेलेपन की भावना, अस्पष्ट बीमारियां और जीवन में अचानक नुकसान का कारण बन सकता है।

करियर और धन

शोध (Research), ज्योतिष, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग या आध्यात्मिक कार्यों में सफलता मिल सकती है। पारंपरिक करियर में रुचि कम हो सकती है और करियर में अचानक बदलाव आ सकते हैं।

रिश्ते और परिवार

व्यक्ति अपने परिवार और सामाजिक संपर्कों से कुछ हद तक कटा हुआ महसूस कर सकता है। रिश्तों में वैराग्य या गलतफहमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

मानसिक परिवर्तन

अंतर्ज्ञान (Sixth sense) बहुत मजबूत हो जाता है। व्यक्ति के मन में "मैं कौन हूँ?" जैसे गहरे दार्शनिक प्रश्न उठते हैं।

उपाय

भगवान गणेश या कुत्ता (भैरव का प्रतीक) की सेवा करना, ध्यान (Meditation) करना, और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना केतु के कुप्रभावों को कम करता है।