जन्मज्योति

केतु ग्रह

वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह का महत्व, प्रभाव और विशेषताएं

खगोलीय प्रकार (Type)

छाया ग्रह (Shadow Planet)

वैदिक भूमिका (Role)

वैरागी (Ascetic)

उच्च राशि (Exaltation)

धनु (Sagittarius) / वृश्चिक (Scorpio)*

नीच राशि (Debilitation)

मिथुन (Gemini) / वृषभ (Taurus)*

केतु ग्रह का महत्व

केतु (South Node) राहु का विपरीत बिंदु है। इसे मोक्ष, आध्यात्मिकता, वैराग्य और पिछले जन्म के कर्मों का कारक माना जाता है। यह भौतिक चीजों से दूर ले जाने का काम करता है।

सामान्य प्रभाव

केतु बिना सिर वाला धड़ है, इसलिए यह तर्क से नहीं बल्कि गहराई से महसूस करता है। यह जिस भाव में बैठता है, व्यक्ति को अक्सर उस भाव की चीजों से विरक्ति या असंतोष होता है।

प्राकृतिक कारक (Significations)

  • मोक्ष
  • वैराग्य और आध्यात्मिकता
  • पिछला जन्म
  • गुह्य विद्या (Occult)
  • त्याग

ℹ️ शैक्षिक तथ्य

खगोलीय रूप से, केतु वह बिंदु है जहां चंद्रमा की कक्षा सूर्य की कक्षा को दक्षिण की ओर काटती है। राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे से ठीक 180 डिग्री की दूरी पर होते हैं।

आपकी कुंडली में केतु कहाँ है?

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जन्मकुंडली

महत्वपूर्ण सूचना (Disclaimer)

ज्योतिष एक प्राचीन और प्रतीकात्मक विद्या है। यह मार्गदर्शन प्रदान करती है, लेकिन जीवन की घटनाओं (जैसे विवाह, नौकरी, स्वास्थ्य या धन) की कोई 100% सटीक गारंटी नहीं देती। कृपया अपने विवेक और कर्मों पर विश्वास रखें।