गुरु महादशा
बृहस्पति (गुरु) की महादशा 16 वर्ष की होती है। गुरु ज्ञान, धर्म, धन, संतान और भाग्य का सबसे बड़ा कारक है। 18 वर्ष की उथल-पुथल वाली राहु दशा के बाद, गुरु की दशा जीवन में स्थिरता, शांति और आध्यात्मिक विकास लेकर आती है।
सामान्य प्रभाव
यह समय आमतौर पर अत्यंत शुभ होता है। शिक्षा, ज्ञान प्राप्ति और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है। शुभ गुरु मान-सम्मान, विवाह, संतान प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि देता है। यदि गुरु पीड़ित हो, तो अति-आशावाद, आलस्य या मोटापे की समस्या हो सकती है।
करियर और धन
शिक्षा, बैंकिंग, कानून (Law), परामर्श या धार्मिक कार्यों से जुड़े करियर में सफलता मिलती है। वित्तीय स्थिति स्थिर और मजबूत होती है, क्योंकि व्यक्ति विवेकपूर्ण निर्णय लेता है।
रिश्ते और परिवार
पारिवारिक जीवन शांतिपूर्ण रहता है। विवाह योग्य लोगों के लिए यह सबसे शुभ समय माना जाता है। बुजुर्गों और गुरुओं का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मानसिक परिवर्तन
व्यक्ति अधिक दार्शनिक, आशावादी और उदार हो जाता है। जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने की इच्छा जाग्रत होती है।
उपाय
गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करना, चने की दाल या केले का दान करना, और अपने गुरुओं या शिक्षकों का सम्मान करना गुरु ग्रह को मजबूत करता है।