जन्मज्योति

शश योग

Sasha Yoga
पंचमहापुरुष योग

शश योग शनि द्वारा निर्मित पंचमहापुरुष योग है। यह न्याय, धैर्य, कठोर परिश्रम, अनुशासन और जनता पर अपार प्रभाव का प्रतीक है।

निर्माण (Formation)

यह योग तब बनता है जब शनि अपनी स्वराशि (मकर, कुंभ) या उच्च राशि (तुला) में होकर कुंडली के केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव में बैठा हो।

महत्व और प्रभाव

यह योग व्यक्ति को एक महान राजनेता, न्यायाधीश, या एक बड़े संगठन का मुखिया बना सकता है। सफलता धीमी होती है, लेकिन जीवन में जो पद मिलता है वह अत्यंत स्थायी होता है।

पारंपरिक दृष्टिकोण

शास्त्र कहते हैं कि शश योग वाला व्यक्ति एक छोटे से गांव से निकलकर एक राज्य का नेता बन सकता है। वह न्यायप्रिय होता है और गरीबों का मसीहा माना जाता है।

महत्वपूर्ण सीमाएं (Caveats)

शनि विलंब का कारक है, इसलिए इस योग के पूर्ण फल 35 वर्ष की आयु के बाद ही दिखाई देते हैं। यदि शनि चंद्रमा के साथ पीड़ित हो, तो यह व्यक्ति को अत्यधिक गंभीर या अवसादग्रस्त बना सकता है।